भारतीय आपराधिक कानून में डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता और न्यायिक चुनौतियों का अध्ययन

Authors

  • डॉ. अतुल कुमार सोनी सहायक प्राध्यापक, पं. किशोरी लाल शुक्ल विधि महाविद्यालय, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ Author

DOI:

https://doi.org/10.63345/

Keywords:

डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, साइबर अपराध, न्यायिक प्रमाणीकरण

Abstract

डिजिटल प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रसार ने भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में साक्ष्य के स्वरूप को मौलिक रूप से परिवर्तित कर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जैसे ई-मेल, सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेज़ अब आपराधिक मुकदमों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। प्रस्तुत शोधपत्र भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता के विधिक ढाँचे का विश्लेषण करता है। इस अध्ययन में 2019 से 2024 के बीच उच्च न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय के 80 चयनित निर्णयों का विश्लेषण किया गया, जिनमें डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता पर विचार किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि लगभग 41% मामलों में डिजिटल साक्ष्य प्रमाणीकरण की प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण अस्वीकार किए गए। शोध यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि भारत में डिजिटल साक्ष्य से संबंधित विधिक प्रावधान यद्यपि प्रगतिशील हैं, किंतु उनके क्रियान्वयन में प्रशिक्षण, मानकीकरण और तकनीकी अवसंरचना की गंभीर कमी है।

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Published

2026-08-17

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